गाय – एक माँ की उपयोगिता :

गाय के घी को चावल के साथ मिला कर जलने पर अत्यंत महत्वपूर्ण गैसें जैसे इथीलीन ऑक्सीड , प्रोपलीन ऑक्सीड , फार्मल्डीहाइड इत्यादि बनती है। इथीलीन ऑक्सीड आज कल सबसे प्रयुक्त होने वाली जीवाणु रोधक गैस है , जो ऑपरेशन थिएटर से लेकर जीवन रक्षक औषधि बनाने में उपयोगी है। गाय के गोबर को सुखाकर जलाने पर अनेक उपयोगी रसायन जैसे मेंथोल , फिनोल , अ मोनिया एवं फॉर्मेलिन का उत्सर्जन होता है। इन सभी रसायनो की जीवाणु क्षमता चिर परचित है आज भी अस्पताल , प्रयोगशाला इत्यादि में इन्ही का प्रयोग किया जाता है। प्रोपलीन ऑक्सीड गैस हमें गाय के घी से हवंन करने पर प्राप्त होती है जो वर्षा करने में सहायक है।

 

 

 

 

 

 

 

 

गौरीश वैदिक हर्बल कंडे के फायदे : अगरबत्ती नहीं धूप जलाये केमिकल नहीं प्राकृतिक अपनाये 

१. पोलुशन की वजह से आज कल सभी का स्वास्थ बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. अशुद्ध वायुमंडल के कारण त्वचा, हड्डियों की बीमारी अस्थमा एवं विभिन्न प्रकार की एलार्गी आदि होना आम बात हो गयी है. एक अध्यन से सिद्ध हो गया है की जिस घर में प्रतिदिन गाय के गोबर से निर्मित कंडे की धुप लगायी जाती है उस घर में किसी भी प्रकार की बीमारी का प्रवेश नहीं होता एवं घर के सभी सदस्य स्वस्थ एवं प्रसन्न रहते हैं.

२. गौरीश औशधिय युक्त कंडे की धुप से मनुष्य के रक्त की शुद्धि एवं मस्तिष्क में सकारात्मक विचारो का प्रवाह तेज हो जाता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है.

३. गौरीश देसी गाय के गोबर से बने शुद्ध एवं सात्विक कंडे हैं. गाय गौशाला के शुद्ध वातावरण में रहती है एवं शुद्ध वनस्पतियों का भोजन करती हैं.

४. गौरीश कन्डो में ग्रह नक्षत्रो की विभिन्न जडीबुटी (हर्ब्स) का प्रयोग किया गया है.

५. प्राकृतिक सुगंध के लिए जड़ी डाली गयी हैं.

६. सभी प्रकार के रेडिएशन से भी गौरीश कंडा पूर्ण सुरक्षा देता है.

७. नवदुर्गा की नो तरह की औशधियों का समावेश किया गया है.

८. नियमित रूप से उपयोग पर घर ऑफिस की नेगेटिविटी को गौरीश कंडा हटा देता है.

९. घर, ऑफिस, फेक्टरी में वास्तु दोष मिटा देता है.

१०. गौरीश कंडे का नियमित रूप से प्रयोग करने से कर्ज समाप्त हो जाता है.

११. विद्यार्थि को सकारात्मक विचर आते है एवं बुद्धि कुशाग्र होती है.

१२. शारीर निरोगी व तेजस्वी बना रहता है.

१३. कलह में शांति प्रदान करता है एवं प्रसन्नता में वृद्धि होती है.

१४. गौरीश कन्डो की राख आचमन योग्य है एवं भस्म भी शारीर लेपन योग्य है.

१५. गौरीश कन्डो की राख को पेड पौधो एवं खेत में डालने से फसलें पुष्ट होती हैं.