क्या हैं  गौरीश वैदिक हर्बल कंडे मे

प्रदुषण की वजह से आज कल सभी का स्वास्थ बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अशुद्ध वायुमंडल के कारण त्वचा, आँखो  की बिमारी, हड्डियों की बीमारी अस्थमा एवं विभिन्न प्रकार की एलर्जी आदि होना आम बात हो गयी है. एक अध्यन से सिद्ध हो गया है की जिस घर में प्रतिदिन गाय के गोबर से निर्मित कंडे की धुप लगायी जाती है उस घर में बीमारी का प्रवेश नहीं होता एवं घर के सभी सदस्य स्वस्थ एवं प्रसन्न रहते हैं। देशी  गाय का गोबर दिव्य रसायन है।

गौरीश औषधिय युक्त कंडे की धुप से मनुष्य के रक्त की शुद्धि एवं मस्तिष्क में सकारात्मक विचारो का प्रवाह तेज हो जाता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। गौरीश देषी गाय के गोबर से बने शुद्ध एवं सात्विक कंडे हैं। गाय गौशाला के शुद्ध वातावरण में रहती है एवं शुद्ध वनस्पतियों का भोजन करती हैं। गौरीश कन्डो में ग्रह नक्षत्रो की विभिन्न जडीबुटी (हर्ब्स) का प्रयोग किया गया है। प्राकृतिक सुगंध के लिए जड़ी डाली गयी हैं। सभी प्रकार के रेडिएशन से भी गौरीश कंडा पूर्ण सुरक्षा देता है। नवदुर्गा की नो तरह की औषधियों का समावेश किया गया है।

गोरीष कंडे में प्रयुक्त होने वाली सामग्री:

आक, पलाष, खैर , अपामार्ग, पीपल, गूलर, शमी, छोकर, ढाक, चन्दन, देवदार, काकप्रिय, बड़, पिलखन, पीत दारू, शाल, पाडर, आम, बकुल, आंवला, अगर, जाई, अर्जुन, नागकेषर, मौलक्षी, चीड़, कदम्ब, जलवेत, महुआ, नीम, खोपरा, अनन्त मूल, अषोक, जामुन, विधारा, अपामार्ग, हर सिंगार, खिरनी, गिलाए, सप्तपर्णी, हल्दी, करंज, शीषम, नागकेषर, लोग, अनार, घवई, झाँउ, तगर, हर सिंगार, गुलाब, द्राणपुष्पी, रीठा, मुण्डी, कूठ, शतावरी, मूसली, सहदेवी, चमेली, गारूड़ी, चक्ररूपा, बिदारी कन्द, चण्डी, ईष्वरी, सुदर्षना, इंद्राणी, सलाई-गूगल, बच, छडीला, जायफल। कंडे की सामग्री में प्रयुक्त प्राकृतिक तेल: नीम, करंज, सलाई, राषघास, कर्पूर, तुलसी, सट्र¨निल, नागर माथा, तिल, दाल चीनी, सरस¨, देवदार, लामनाआ , ग्रास, चन्दन, जटामांसी व अन्य।

गौरीश हर्बल आर्गेनिक देसी गाय के गोबर से बने कंडो का प्रभाव :

इसका नियमित प्रयोग घर, ऑफिस, फैक्ट्री में वास्तु दोष मिटा देता है। गौरीश कंडे का नियमित रूप से प्रयोग करने से धीरे-धीरे कर्ज समाप्त हो जाता है। विद्यार्थि को सकारात्मक विचार आते है एवं बुद्धि कुशाग्र होती है। शरीर निरोगी व तेजस्वी बना रहता है। कलह में शांति प्रदान करता है एवं प्रसन्नता में वृद्धि होती है। गौरीश कन्डो की राख आचमन योग्य है एवं भस्म भी शरीर लेपन योग्य है। गौरीश कन्डो की राख को पेड पौधो एवं खेत में डालने से फसलें पुष्ट होती हैं।

धूप, यज्ञ, हवन में उक्त कंडो के प्रयोग से शुद्धता की ग्यारंटी रहती है और कोई भी सामग्री छूटती नहीं है इस शंका का निवारणभी हो जाता है। यह धूप, यज्ञ के लिए अच्छा बेस मटेरियल है।