क्या कभी आपने विचार किया है ? 

 

हम यज्ञ, हवन, अग्निहोत्र क्यों करते हैं ?

धूप, यज्ञ, हवन आदि से हमें क्या अनुभूति होती है ?

यज्ञ करते समय सही सामग्री का चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है ?

चर्तुमास में भैशज्य यज्ञ क्यों आवष्यक है ?

पूजा के समय

सवाल करें…

अपने आप से ?

 

            

सावधान : 

गलत धूप—यज्ञ—हवन सामग्री प्रदूषण का कारक है 

धूप यज्ञ हवन सामग्री का सही चयन आज की बड़ी आवश्यकता है । सही सामग्री यज्ञ में नही होने से अनेक कष्ट होते है। यह बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं है तथा इसकी जानकारी एवं पहचान का अभाव है। अधिकतर लोग रेडिमेड सामग्री लाते हैं, उसी से यज्ञ होता है।

आज बाजार में मिलने वाली हवन सामग्री में जो जड़ीबूटियों का प्रयोग होता है वे साफ सुथरी व असली नहीं होती अधिकतर सामग्री का तेल निकला होता है, रसयुक्त सामग्री नहीं होने से वह प्रभावहीन हो जाती है। हवन का परिणाम आनंदायक नहीं रहता है।

यज्ञ करने वाले व्यक्ति को जो अनुभव होता है, वह उसे विचलित करता है। ऐसी सामग्रियों के उपयोग से प्रदुषण फैलता है। मन अषांत होता है। कार्बन डाय अॉक्साईड व अन्य हानीकारक गैस बनती है।

बाजार में बिकने वाली सामग्री में असली जड़ीबूटियाँ नहीं डाली जाती, न ही अनुपात सही रहता है, आप विचार कीजिए 1000रु. किलो से 5000रु. किलो तक बिकने वाली जड़ीबुटियाँ आपको 200रु. किलो में कैसे मिल सकती है। यह विचारणीय प्रश्न है अतः हमे हमारे स्वास्थ को संरक्षण करने वाली धूप यज्ञ हवन सामाग्री पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

सुगंधित जड़ीबूटियों की जगह सुगंध के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाता है। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है जिससे घबराहट, बैचेनी व अन्य स्वषन संबंधी बिमारियाँ होने की संभावना होती है।

यज्ञ करते समय नीचे किसी भी लकड़ी से आग जलाकर ऊपर से कुछ भी मिलावटी सामान या अषुद्ध सामग्री होमना क्या हवन है? नहीं ना। इसलिए ध्यान रहे यज्ञ, हवन, अग्निहोत्र  करते समय सही सामग्री ही आपके प्रयोजन के  पूरा करती है।

पंडितजी प्रतिदिन यज्ञ के सम्पर्क में रहते है। तो सबसे पहले और जल्दी इसका प्रभाव उन्हीं पर पडेगा। बिना सही सामग्री की जाँच किये पंडितो  को  यज्ञ नहीं करना चाहिए। ऐसे यज्ञ से आप बीमार पड़ेंगे, यह आपके स्वास्थ्य का सवाल है।

मिलावट युक्त सामग्री का इस्तेमाल से उत्पन्न धुएं में हाईड्रो जनसल्फाईड, नाइट्रोजन ऑक्साईड, कार्बन मोनो ऑक्साईड, मिथेन  प्रमुख है।

वातावरण में धुएं के रूप में अतिसूक्ष्म पदार्थ मुक्त तत्वो का हिस्सा होता है, जिसका व्यास 10 माइक्र¨मीटर होता है, यही वजह है कि यह नाक के छेद में आसानी से प्रवेष कर जाता है, जो सीधे मानव शरीर के श्वसन प्रणाली, हृदय, फेफड़े के प्रभावित करता है। धुएं की वजह से शारीरिक परिवर्तन से लेकर साँस फूलना, घवराहट, खाँसी, हृदय व फेफड़ा संबंधी दिक्कतें, आंखो में संक्रमण, दमा का अटैक, गले में संक्रमण आदि की परेषानी होती है।

आज पर्यावरण प्रदूषित होने से मनुष्य मे मानसिक प्रदूषण बढ़ रहा है जिससे तनाव तथा परिवारिक विघटन हो रहा है। सभी आत्म केन्द्रीत होते जा रहे है। साथ ही समाज में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जैसे अनिंद्रा, डिप्रेषन, सनकीपन, अधीर पन, घबराहट, जल्दीबाजी, झुंझलाहट, एकाकीपन, खालीपन, शक्की स्वभाव, असुरक्षा की भावना हमेशा चितिंत रहना इत्यादि।

शोधकायरो से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि वायुमंडलो  में आयनो  की संख्या मनुष्य के व्यवहार व उसके स्वास्थ्य को  बहुत हद तक प्रभावित करती है। यदि आयनो  की संख्या घट जाए तो  अनके प्रकार की परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं जैसे सिर दर्द, बेहोषी, काम में अरूचि आदि। धूप, यज्ञ, हवन से एक प्रकार की शक्ति एवं ऊर्जा उत्पन्न होती है जो वातावरण में आयनो  की संख्या बढ़ाती है । इसलिए यज्ञ मे हमें शुद्ध एवं असली सामग्री का प्रयोग करना चाहिए।

आज अर्ध विक्षिप्तता, सनक, बुरी आदतें, अपराधी प्रवृत्तियाँ, उच्छृंखलता, आवेशग्रस्तता, दुर्भावना जैसी मानसिक व्याधियाँ मनुष्य को  कहीं अधिक दुःख दे रही है अोर विपत्ती का कारण बन रही है। आसका निवारण धूप, यज्ञ, हवन से संभव है। मिलावट युक्त सामग्री का इस्तेमाल से इसका विपरित प्रभाव हो सकता है।

हमें हमारे स्वास्थ्य को  संरक्षण करने वाली धूप, यज्ञ, हवन सामग्री पर विशष ध्यान देने की आवशयक्ता  है। धूप, यज्ञ, हवन से हमारे जीवन में उत्साह बना रहता है। यज्ञ पर देश  और  दुनिया के अनेक स्थानो  पर शोध हुए हैं और  इनके आधार पर ये निष्कर्ष निकाले गए हैं कि धूप,यज्ञ, हवन के अनेकानेक लाभ हैं। वायुषोधन, पंचमहाभूत से लेकर  जीवन को  पवित्र करने में धूप, यज्ञ, हवन की महत्वपूर्ण भूमिका है।