वेदो के प्राण ऊर्जा विज्ञानं पर वैज्ञानिको को अपनी और आकर्षित किया है ।
धुप यज्ञ हवं अग्निहोत्र की गैसों मई रोगाणुओं को निष्क्रिय करने की अदभुत क्षमता है ।
वायु, जल, ध्वनि, भूमि, सूर्य किरणों तथा अणु विकिरण के प्रदूषण को रोकने व उसके दुष्प्रभावों से पीड़ित को स्वस्थ करने मे यह तकनीक जो मनुष्य के रोग के करने को उसके शरीर, मन, आत्मा और पर्यावरण से एक साथ समाप्त करके उसे इन सभी स्तरों पर स्वस्थ प्रदान करे।
वर्तमान प्रदूषित वातावरण मे अपने व् अपने परिवार का शारीरिक, मानसिक व् आध्यात्मिक स्वास्थ बनाये रखने का यह अनोखा साधन है ।

पञ्च महामुत पञ्च कमेन्द्रिया, पञ्च  प्राण, पञ्च ज्ञानंदिया, तथा मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त का तारतम्य गौरीश धुप यज्ञ हवन सामग्री द्वारा प्राप्त करे। यह अनुभव प्रेम से परिपूरित अनंत आनद उल्लास तथा जीवन शक्ति से भरी जीवन दृष्टि विकसित करता है।

आज अमर्यादित उपभोग की प्रवत्ति ही वर्तमान मे मनुष्यता की सबसे बड़ी समस्या है। अमर्यादित, असभ्य, असयमित, हिंसा, द्वेष, घृणा, लोभ, कपट, से भरी उपयोग दृष्टि से वृक्ष, वन, जीवजंतु, नदी, झील, जलाशय, मिटटी, पर्वत, हवा, आकाश सबके प्रति उपभोगवाद से जनित भौतिक विकास का पागलपन हमारे जीवन मे उतर गया है ।

इस प्रदूषित मन प्रदूषित वातावरण को गौरीश धुप यज्ञ हवन सामग्री द्वारा शुद्ध करे । (remove toxic effect)

आज पूजन सामग्री मे इतनी गिरावट आ चुकी है की वह हमे एलर्जी, बीमारी व मानसिक प्रदूषण दे रही है। मिलावट एवं केमिकल से भरपूर सामग्रियों का बाजार भरा पढ़ा है। यह हमारा विकास है या पतन।
जिस ईश्वर से हम सब कुछ मांग रहे है उसे सर्वश्रेष्ठ समर्पित भी करना चाहिए केवल चिन्ह पूजा कर मन की प्रसन्नता शांति प्राप्त नहीं होगी न अच्छा स्वास्थ प्राप्त होगा।