हम धूप, यज्ञ, हवन सामग्री पर कार्य करते है।

धूप यज्ञ हवन मैं हमें क्या दिखता है। अनुभव क्या होता है।

किसी उल्टे पिरामिड आकार के पात्र में या हवन कुण्ड में नीचे कुछ लकड़ियां जलाई जाती है। और उनके उपर वनस्पतियो को अर्पित किया जाता है। इससे बनने वाले वातावरण को हम अनुभव करते है। इससे हमारे आस पास का वातावरण शुद्ध हो जाता है।

यज्ञ हवन करते समय नीचे जलाया क्या जाए और उपर से डाला क्या जाए। इसी विषय पर हमारे द्वारा कार्य किया जाता है।

इस क्रिया से स्वास्थ प्रद, सुगंदित, प्रगतिशील तॆज युक्त वातावरण उत्तपन्न हो हमारे आस पास के वायरस किटाणु फंगस नस्ट हो और हमारा इम्यून सिस्टम स्ट्रांग हो इस प्रकार की व्यवस्था धूप, यज्ञ, हवन से ही उचित है। इसमें उपयोग आने वाली सामग्री क्या हो, क्यों हो और उसे उपयोग कैसे किया जाये इसी विषय पर हमारे द्वारा काम किया जाता है।
उपयोग का उचित समय संधिकाल होता है , उस समय वायरस कीटाणु ज्यादा उग्र होते है , सुबह 6 से 7 एवं शाम 5 से 7 उचित संधि समय होता है।