हम धूप यज्ञ हवन सामग्री जहाँ पैदा होती है वहाँ एकत्रित करवा कर खरीदते है एवं उन्हें नक्षत्रो में तुड़वाते हैं जो  शक्ति  है जिससे सामग्री रसपूर्ण एवं पूर्ण ऊर्जा युक्त होती है। यज्ञ के समय आप क्या देखते हैं और  क्या अनुभव करते हैं। नीचे कुछ लकड़ियाँ जल रही है और  ऊपर से वनस्पतियो  का मिश्रण डाला जा रहा है, यह हमें प्रत्यक्ष दिखता व अनुभव होता है यह प्रथम अनुभव अत्यंत ही महत्वपूर्ण है अगर इसकी ऊर्जा अच्छा अनुभव कराती है व सही ऊर्जावान वातावरण निर्मित करती है तभी हम वहां बैठ सकते हैं। प्रसन्ताए प्रफुलित, एवं आनंद की अनुभूति प्राप्त करते हैं। उसके लिए वह स्थान प्रदुषण से मुक्त होना आवश्यक है। यह सही सामग्री के मिश्रण से ही संभव है। हमारे द्वारा सामग्री के इन्ही बातो  के उत्तर पर रिसर्च कार्य किया गया है। नीचे क्या जलाना है और ऊपर से क्या डालना है। जो  हमें वैज्ञानिक और  आध्यात्मिक लाभ दे सके। शास्त्रो में पूजन, ध्यान, मंत्र जाप, अनुष्ठान, सोलह संस्कारो व सभी इस प्रकार के प्रयोजनो  में धूप, यज्ञ, हवन की अनिवार्यता का अत्याधिक महत्व दर्शाया गया है वर्तमान में इनमें लगने वाली सामग्री में निरंतर गिरावट आती चली गयी विकार उत्पन्न होते चले  गये सही सामग्री के  होने से पूजा स्वरूप, पूजा का भाव, उद्देश्य पीछे छूटता चला गया जो  शक्ति, उत्साह, परिणाम प्राप्त होना चाहिए वह घटते गये हमारे द्वारा धूप, यज्ञ, हवन सामग्री के शक्ति  सिद्धांतो  के अनुरूप एवं अनुसंधान के बाद सामग्री तैयारी की जाती है। ताकि वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदुषण एवं मानसिक प्रदुषण को  शुद्ध किया जा सके संस्कृति परम्परा मूल स्वरूप में ऊर्जा व उत्साह से परिपूर्ण रहे हमारे स्वास्थ व बौद्धिक क्षमताअो  का विकास हो  नई पीढ़ी इन्हें आत्मसात कर सके हम बौद्धिक आध्यात्मिक, वैचारिक उन्नति करें।

 

एशिया में विभिन्न सम्प्रदाओं के करोड़ो व्यक्ति पूजा के समय या प्रातः दुकान अथवा दफ्तर खोलते समय अगरबत्ती या धूपबत्ती विशेष रूप से जलाते है, इसके अतिरिक्त मन्दिरो , मजिस्दो , गुरुद्वारो तथा अन्य पूजा-स्थलो एवं धार्मिक उत्सवो आदि के अवसरो पर भी धूप, दीप अनिवार्य है। हिन्दू जाति में देवताअो की पूजा का महत्वपूर्ण स्थान है- लाखो भक्तगण अपने आराध्य देव की पूजा के समय धूपबत्ती, अगरबत्ती तथा हवन-सामग्री आदि का प्रयोग में लाते है । इस सामग्री में पेड़-पोधो वनस्पतियो से प्राप्त होने वाली जड़ियाँ होती है। भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु ऋतुअो तथा अन्य परिस्थितियो के कारण, लगभग 1 हजार प्रकार के सुगन्धवान पोधो आदि पाये जाते हैं, जिनकी पत्तियो , छाल, लकड़ी, फूलो और बोर या फलो इत्यादि से विभिन्न प्रकार के नैसर्गिक वाष्पशील सुगन्धित तेल प्राप्त किये जाते हैं।

नीचे ऐसे पेड़-पोधो की लकड़ियाँ जलाना जिसका कोयला न बनता हो जिससे कम धुआं कम निकलता हो ऊपर से ऐसी वनस्पतियो का मिश्रण डालना जो वायरस किटाणु, फंगस, बैक्टिेरिया नाशक है, जिससे वातावरण शुद्ध होता है जो हमारे शरीर को रोगो से मुक्त करें हमारे इम्यून सिस्टम के स्ट्रांग करें प्राकृतिक सुगंधयुक्त है , पुष्टीकारक हो , रुचिकर हो ऐसी धूप, यज्ञ, हवन सामग्री का निर्माण करने का उत्तम प्रयास हमारे द्वारा किया जाता है। इसमें लगने वाली सामग्री पेड़-पोधो के विभिन्न अंगो से प्राप्त होती है जैसे-

लकड़ियाँ: अगर, चन्दन, देवदार व अन्य, जड़ें: कपूर काचरी, बालछड़, खस, नागरमथा, नर कपूर, धूप लकड़ी व अन्य,

कन्द और मूल: हल्दी, बड़ा कुलिंजन, खस, आम्बा हल्दी, बच व अन्य,

छालें: दाल चीनी, तज, गूलर, भोजपत्रो व अन्य, पत्त्: तेजपत्ताए बांसा, ब्राह्मी व अन्य,

फूलः गुलाब, मोलश्री, पारिजात, कमल व अन्य,

फल: अंगुर, बेल, जायफल, अखरोट, तेज

बल, हाउबेर, नारंगी व अन्य,

बीज: इलायची, सरस, तिल, अजवाईन व अन्य,

गोंदः लोभान, गूगल, शिलाजीत, कपूर व अन्य,

पंचांग: तुलसी, नीम व अन्य।